गुरुवार, 15 जून 2017
गुरुवार, 1 जून 2017
शुक्रवार, 17 मार्च 2017
DIL SE DIL TAK
Nazare Mile To Pyar Ho Jata Hai,
Palke Uthe To Izhaar Ho Jata Hai,
Na Jane Kya Kasish Hai Chahat Main,
Ke Koi Anjaan Bhi Hamari
Zindagi Ka Haqdaar Ho Jata Hai…
Ae dost zindagi bhar mujhse dosti nibhaana,
dil ki koi bhi baat humse kabhi na chupaana,
sath chalna mere tum dukh sukh mein
bhatak jau mein jo kabhi sahi raasta dikhlaana…
Waqt guzrega hum bikhar jayenge,
kaun jane k hum kidhar jayenge….
Hum apki parchayi hain yaad rakhna,
jahan tanhai mili wahan hum nazar ayenge…
Duniya ka har shauk pala nahi jata,
Kaanch ke khilono ko uchala nahi jata,
Mehnat karne se mushqile ho jati hai aasan,
Kyunki har kaam taqdeero per tala nahi jata…
Har kadam aapke hothon pe hansi ho,
haar pal aapke dil me khushi ho,
sitare bhi zameen par aakar aapko gherle,
aisi chand ke tarah chamakti aapki zindagi ho…
'Thokare' Kha Kar Bhi Agar Na Sambhle To
'Musafir' Ka Naseeb..
Warna
Raahon Ke 'Patthar' To
Apna Farz Adaa Karte Hi Hain.
Khushiya milti nahi mangne se,
Manzil milti nahi raah par ruk jane se,
Bharosa rakhana apne aap par aur us RAB par,
Sab kuchh deta hai wo sahi waqt aane par.
Khubsurat sa ek pal kissa ban jata hai,
Jane kab kaun zindagi ka hissa ban jata hai,
Kuch log zindagi me milte hain aise,
Jinse kabhi na tutnewala rishta banjata hai…
Dua Karte Hain Rabse Hum Yuhi Sath Rahe,
Pyar Ke Is Rishte Ko Puri Imandari Se Nibhaye,
Mana Zindgi Ki Raho me Kuchh Kante Bhi Milenge,
Par Aap Agar Sath Honge To
Kanto Per Bhi Phool Samajkar Chalte Rahenge…
Palke Uthe To Izhaar Ho Jata Hai,
Na Jane Kya Kasish Hai Chahat Main,
Ke Koi Anjaan Bhi Hamari
Zindagi Ka Haqdaar Ho Jata Hai…
Ae dost zindagi bhar mujhse dosti nibhaana,
dil ki koi bhi baat humse kabhi na chupaana,
sath chalna mere tum dukh sukh mein
bhatak jau mein jo kabhi sahi raasta dikhlaana…
Waqt guzrega hum bikhar jayenge,
kaun jane k hum kidhar jayenge….
Hum apki parchayi hain yaad rakhna,
jahan tanhai mili wahan hum nazar ayenge…
Duniya ka har shauk pala nahi jata,
Kaanch ke khilono ko uchala nahi jata,
Mehnat karne se mushqile ho jati hai aasan,
Kyunki har kaam taqdeero per tala nahi jata…
Har kadam aapke hothon pe hansi ho,
haar pal aapke dil me khushi ho,
sitare bhi zameen par aakar aapko gherle,
aisi chand ke tarah chamakti aapki zindagi ho…
'Thokare' Kha Kar Bhi Agar Na Sambhle To
'Musafir' Ka Naseeb..
Warna
Raahon Ke 'Patthar' To
Apna Farz Adaa Karte Hi Hain.
Khushiya milti nahi mangne se,
Manzil milti nahi raah par ruk jane se,
Bharosa rakhana apne aap par aur us RAB par,
Sab kuchh deta hai wo sahi waqt aane par.
Khubsurat sa ek pal kissa ban jata hai,
Jane kab kaun zindagi ka hissa ban jata hai,
Kuch log zindagi me milte hain aise,
Jinse kabhi na tutnewala rishta banjata hai…
Dua Karte Hain Rabse Hum Yuhi Sath Rahe,
Pyar Ke Is Rishte Ko Puri Imandari Se Nibhaye,
Mana Zindgi Ki Raho me Kuchh Kante Bhi Milenge,
Par Aap Agar Sath Honge To
Kanto Per Bhi Phool Samajkar Chalte Rahenge…
मंगलवार, 14 मार्च 2017
बुधवार, 8 जून 2016
TIME HAS CHANGED..
MEMORIES OF CHILDHOOD
गुलज़ार साहब की कविता :-
जब मैं छोटा था,
शायद दुनिया
बहुत बड़ी हुआ करती थी..
शायद दुनिया
बहुत बड़ी हुआ करती थी..
मुझे याद है
मेरे घर से "स्कूल" तक का
वो रास्ता,
मेरे घर से "स्कूल" तक का
वो रास्ता,
क्या क्या
नहीं था वहां,
चाट के ठेले,
जलेबी की दुकान,
बर्फ के गोले
सब कुछ,
नहीं था वहां,
चाट के ठेले,
जलेबी की दुकान,
बर्फ के गोले
सब कुछ,
अब वहां
"मोबाइल शॉप",
"विडियो पार्लर" हैं,
"मोबाइल शॉप",
"विडियो पार्लर" हैं,
फिर भी
सब सूना है..
सब सूना है..
शायद
अब दुनिया
सिमट रही है...
.
.
.
अब दुनिया
सिमट रही है...
.
.
.
जब
मैं छोटा था,
शायद
शामें बहुत लम्बी
हुआ करती थीं...
मैं छोटा था,
शायद
शामें बहुत लम्बी
हुआ करती थीं...
मैं हाथ में
पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था,
पतंग की डोर पकड़े,
घंटों उड़ा करता था,
वो लम्बी
"साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,
"साइकिल रेस",
वो बचपन के खेल,
वो
हर शाम
थक के चूर हो जाना,
हर शाम
थक के चूर हो जाना,
अब
शाम नहीं होती,
शाम नहीं होती,
दिन ढलता है
और
सीधे रात हो जाती है.
और
सीधे रात हो जाती है.
शायद
वक्त सिमट रहा है..
वक्त सिमट रहा है..
जब
मैं छोटा था,
शायद दोस्ती
बहुत गहरी
हुआ करती थी,
मैं छोटा था,
शायद दोस्ती
बहुत गहरी
हुआ करती थी,
दिन भर
वो हुजूम बनाकर
खेलना,
वो हुजूम बनाकर
खेलना,
वो
दोस्तों के
घर का खाना,
दोस्तों के
घर का खाना,
वो
लड़कियों की
बातें,
लड़कियों की
बातें,
वो
साथ रोना...
साथ रोना...
अब भी
मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती
जाने कहाँ है,
मेरे कई दोस्त हैं,
पर दोस्ती
जाने कहाँ है,
जब भी
"traffic signal"
पर मिलते हैं
"Hi" हो जाती है,
"traffic signal"
पर मिलते हैं
"Hi" हो जाती है,
और
अपने अपने
रास्ते चल देते हैं,
अपने अपने
रास्ते चल देते हैं,
होली,
दीवाली,
जन्मदिन,
नए साल पर
बस SMS आ जाते हैं,
दीवाली,
जन्मदिन,
नए साल पर
बस SMS आ जाते हैं,
शायद
अब रिश्ते
बदल रहें हैं..
अब रिश्ते
बदल रहें हैं..
जब
मैं छोटा था,
तब खेल भी
अजीब हुआ करते थे,
मैं छोटा था,
तब खेल भी
अजीब हुआ करते थे,
छुपन छुपाई,
लंगडी टांग,
पोषम पा,
टिप्पी टीपी टाप.
अब
internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..
लंगडी टांग,
पोषम पा,
टिप्पी टीपी टाप.
अब
internet, office,
से फुर्सत ही नहीं मिलती..
शायद
ज़िन्दगी
बदल रही है.
.
.
जिंदगी का
सबसे बड़ा सच
यही है..
जो अकसर
क़ब्रिस्तान के बाहर
बोर्ड पर
लिखा होता है...
ज़िन्दगी
बदल रही है.
.
.
जिंदगी का
सबसे बड़ा सच
यही है..
जो अकसर
क़ब्रिस्तान के बाहर
बोर्ड पर
लिखा होता है...
"मंजिल तो
यही थी,
बस
जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"
.
ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...
यही थी,
बस
जिंदगी गुज़र गयी मेरी
यहाँ आते आते"
.
ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...
कल की
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है..
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है..
अब
बच गए
इस पल में..
बच गए
इस पल में..
तमन्नाओं से भरे
इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.
इस जिंदगी में
हम सिर्फ भाग रहे हैं.
कुछ रफ़्तार
धीमी करो,
धीमी करो,
और
बुधवार, 1 जून 2016
SANT KABIR DAS JI KE INSPIRATIONAL DOHE IN HINDI : WITH MEANING
दोहा:- हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमानाआपस में दोउ लड़ी-लड़ी मरे, मरम न जाना कोई।
अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि हिन्दुओं को राम प्यारा है और मुसलमानों को रहमान| इसी बात पर वे आपस में झगड़ते रहते है लेकिन सच्चाई को नहीं जान पाते |
दोहा:- काल करे सो आज कर, आज करे सो अबपल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब |
अर्थ:- कबीर दास जी कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो| जीवन बहुत छोटा होता है अगर पल भर में समाप्त हो गया तो बाद मे क्या करोगे|
दोहा:- धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय|
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कि हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए| अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सींच लेगा तो भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेंगे|
दोहा:- निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवायबिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय|
अर्थ:- कबीर जी कहते है कि निंदा करने वाले व्यक्तियों को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्ति बिना पानी और साबुन के हमारे स्वभाव को स्वच्छ कर देते है|
दोहा:- माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीखमाँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख|
अर्थ:- कबीरदास जी कहते कि माँगना मरने के समान है इसलिए कभी भी किसी से कुछ मत मांगो|
दोहा:- साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय|
अर्थ:- कबीर दास जी कहते कि हे परमात्मा तुम मुझे केवल इतना दीजिये कि जिसमे मेरे परिवार का गुजारा चल जाये| मैं भी भूखा न रहूँ और अतिथि भी भूखा वापस न जाए|
दोहा:- दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय|
अर्थ:- कबीर कहते कि सुख में भगवान को कोई याद नहीं करता लेकिन दुःख में सभी भगवान से प्रार्थना करते है| अगर सुख में भगवान को याद किया जाये तो दुःख क्यों होगा|
दोहा:- तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होयकबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कभी भी पैर में आने वाले तिनके की भी निंदा नहीं करनी चाहिए क्योंकिं अगर वही तिनका आँख में चला जाए तो बहुत पीड़ा होगी|
दोहा:- साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं
धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते कि साधू हमेशा करुणा,धन और प्रेम का भूखा होता और कभी भी धन का भूखा नहीं होता| और जो धन का भूखा होता है वह साधू नहीं हो सकता|
दोहा:- माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
अर्थ:- कबीर जी कहते है कि कुछ लोग वर्षों तक हाथ में लेकर माला फेरते है लेकिन उनका मन नहीं बदलता अर्थात् उनका मन वास्तविकता , सत्य और प्रेम की ओर नहीं जाता| ऐसे व्यक्तियों को माला छोड़कर अपने मन को बदलने का प्रयास करना चाहिए और और जीवन को सच्चाई के रास्ते पर ले जाना चाहिये।
दोहा:- जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है अगर हमारा मन शीतल है तो इस संसार में हमारा कोई बैरी नहीं हो सकता| अगर अहंकार छोड़ दें तो हर कोई हम पर दया और प्रेम करने को तैयार हो जाता है|
दोहा:- जैसा भोजन खाइये , तैसा ही मन होय
जैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कि हम जैसा भोजन करते है वैसा ही हमारा मन हो जाता है और हम जैसा पानी पीते है वैसी ही हमारी वाणी हो जाती है|
शनिवार, 28 मई 2016
DAUGHTERS: BESTEST GIFT EVER
DAUGHTERS : BESTEST GIFT EVER
बेटियाँ : अनमोल धन
माँ के कलेजे का टुकड़ा ,उसकी परछाई होती है बेटी। सबसे ज़्यादा भाईयो से लड़ती है बहना। पर अगर उसके भाई पर कोई ऊँगली भी उठा दे तो उसका पूरा बदला लेकर भाई की रक्षा करती है बहना ।सबसे ज़्यादा फसांती भी वही है और सबसे ज्यादा बचाती भी वही है।
वही घर पर हमेशा छोटी छोटी बातों पर भी झगड़ जाती है भाई से. सबसे ज़्यादा डांट भी यहीं खाती है.. जब इनकी कोई शिकायत करदे तो अपना मुंह फुला लेती है ये बेटी। पर कुछ भी कहो सबकी लाड़ली होती है. इनके बिना घर सुना सुना सा लगता है. इनकी चहल पहल से ,इनकी किलकारियों से,इनकी शरारतों से पूरा घर महकता रहता है। .तभी तो कहते है बिटियाँ बिना स्वर्ग अधूरा।
सबके दुखो को दूर करती है ,सभी की चिंता होती है इन्हे. सबकी ख़ुशी के लिए कभी कभी अपनी खुशियां भी न्यौछावर कर देती है..
भाई को आंच तक न आये यही मंगलकामनयो के साथ राखी त्यौहार और भाई दूज बनाती है। दुआ करती है उनकी उम्र भी उनके भाई को लग जाए। .
माँ -बाप की चिंता सबसे ज़्यादा इन्हें ही सताती है तभी खुद की शादी से दूर भागती है बेटियाँ। .
जब भी सुनती है अपनी विदाई के लिए तो आँखों से आँसुओ की गंगा बहाना शुरू कर देती है। .
और कहती है मुझे नहीं करनी अभी शादी ,,अभी मेरी उम्र ही क्या है. पहले भाई की शादी कर दो. बस मुंह फुला कर चली जाती है. और सबपर गुस्सा दिखाती है.
माँ -बाप की चिंता सबसे ज़्यादा इन्हें ही सताती है तभी खुद की शादी से दूर भागती है बेटियाँ। .
जब भी सुनती है अपनी विदाई के लिए तो आँखों से आँसुओ की गंगा बहाना शुरू कर देती है। .
और कहती है मुझे नहीं करनी अभी शादी ,,अभी मेरी उम्र ही क्या है. पहले भाई की शादी कर दो. बस मुंह फुला कर चली जाती है. और सबपर गुस्सा दिखाती है.
माँ का ये कहना की कुछ काम करना सिख ले आगे ससुराल मे जाकर क्या करेगी। .तब भी गुस्से से झल्ला कर कहती है नौकरानी रख लेंगे ससुराल वाले।
कभी कभी भाइयों से खुद की तुलना करती है ये बेटियाँ
.
विदाई के वक़्त :---.
आता है जब विदाई का वक़्त तो होठ सिल जाते है इनके, बस बहते है तो सिर्फ आँसू.
. यहीं कहते है क्यों करते हो मुझे पराया बाबुल। .मैं तो इसी आँगन में खेली हू.
..मेरा सारा बचपन यही बिता है। .क्यों आगे की ज़िन्दगी यहाँ नहीं बिता सकती। .
क्यों बनाया ऐसा रिवाज़ पापा। क्यों कर रहे हो अपनी लाड़ली को खुद यहाँ से पराया।
सोचती हूँ आज कितना अजीब मंजर है.
छोड़ कर जाना मुझे अपना ही ये घर है.
अब आना होगा अपने ही घर मे मेहमान बनकर
कुछ पलों मे वापिस लौट जाने के लिए।
वो भाई जो हमेशा मुझसे लड़ते थे ,आज उनकी भी नज़रे झुकी और आँख नाम है.
" मेरी माँ जो हमेशा मेरी शादी की बात करती थी. ,आज आँखों के साथ साथ रोती उसकी हर धड़कन है "
पापा जो कभी बहुत डांटते थे ,काफ़ी पाबंदिया लगाते थे, आज झुका उनका भी सर है.
पापा जो कभी बहुत डांटते थे ,काफ़ी पाबंदिया लगाते थे, आज झुका उनका भी सर है.
ख़ुशी या ग़म :-----
सबकी बाते कह दी मैंने पर मेरा क्या हाल था ये किसी ने न जाना
सोच कर ख़ुश हूँ ,आज पूरा हुआ मेरी शादी का अरमान है
एक तरफ ख़ुशी तो , एक तरफ ग़म का फ़रमान हैं ''
सोच कर ख़ुश हूँ ,आज पूरा हुआ मेरी शादी का अरमान है
एक तरफ ख़ुशी तो , एक तरफ ग़म का फ़रमान हैं ''
कल ससुराल चली जाऊँगी ,फिर सबकों बहुत याद आऊंगी
बहन -भाइयों से मिलने ,उनके साथ झगड़ने को तरस जाऊँगी
सुबह की चाय तेरे हाथ का खाना बहुत याद आएगा माँ
पापा का प्यार से गले लगाना बहुत सताएगा माँ ॥
छोड़ बाबुल का घर, पिया का घर बसाने चली
एक सफ़र हुआ खत्म ,दूसरा सफ़र शुरू करने चली !!
जो हुए है मेरे हमसफ़र ,अब साथ उनके बिताने अपनी पूरी ज़िन्दगी चली
अब उनका घर ही मेरा घर होगा, इस सोच के साथ घर अपना छोड़ चली !!
लाख समझाया दिल को मैंने ,पर मायके का मोह अभी तक न छूटा
क्यों बेटियाँ ही होती है परायी ,क्यों ऐसी रीत ख़ुदा तूने बनायीं |
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